मशरूम उत्पादन एक लाभकारी कृषि व्यवसाय है, जो कम लागत और सीमित स्थान में भी किया जा सकता है। इसकी खेती कई प्रकार की तकनीकों से की जाती है, जैसे कम्पोस्टिंग, शेड निर्माण, और नियंत्रित वातावरण में उत्पादन।
मशरूम को पोषण से भरपूर माना जाता है, जिससे इसकी मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है। सही विधियों का पालन करके किसान मशरूम उत्पादन से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
किसान भाइयों, अगर आप भी मशरूम की पैदावार से शानदार मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो मशरूम उगाने की ये तीन प्रमुख तकनीकें आपके लिए बेहद मददगार साबित हो सकती हैं। हम जिन तकनीकों की बात कर रहे हैं, वे हैं शेल्फ तकनीक, पॉलीथीन बैग तकनीक, और ट्रे तकनीक। इस लेख में हम इन तकनीकों की विस्तृत जानकारी साझा करेंगे।
भारत में मशरूम की खेती किसानों के लिए एक नकदी फसल है, जो कम लागत में अच्छा मुनाफा देती है। मौजूदा समय में देश-विदेश के बाजारों में मशरूम की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे इसकी कीमतों में भी इजाफा हो रहा है। ऐसे में यदि किसान अपने खेतों में मशरूम की खेती करते हैं, तो वे बड़े पैमाने पर मुनाफा कमा सकते हैं।
आज हम इन्हीं तीन शानदार तकनीकों की जानकारी लेकर आए हैं, जो मशरूम की उपज को बढ़ाने में सहायक होंगी।

मशरूम उत्पादन हेतु तीन बेहतरीन तकनीक निम्नलिखित हैं
मशरूम उगाने की शेल्फ तकनीक
मशरूम उगाने की इस उन्नत तकनीक में किसान को मजबूत लकड़ी के लगभग एक से डेढ़ इंच मोटे तख्तों से शेल्फ तैयार करना होता है, जिन्हें लोहे की कोणों वाली फ्रेमों से जोड़कर व्यवस्थित किया जाता है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इस्तेमाल की जाने वाली लकड़ी उच्च गुणवत्ता वाली हो, ताकि वह खाद और अन्य सामग्री का भार आसानी से सह सके।
शेल्फ की चौड़ाई लगभग 3 फीट होनी चाहिए, और शेल्फों के बीच की दूरी डेढ़ फुट होनी चाहिए। इस तरीके से किसान शेल्फों को पांच मंजिल तक व्यवस्थित कर मशरूम की पैदावार कर सकते हैं।
मशरूम उत्पादन की पॉलीथीन बैग तकनीक
मशरूम उगाने की पॉलीथीन बैग तकनीक किसानों के बीच सबसे लोकप्रिय है, क्योंकि इसमें अधिक मेहनत की आवश्यकता नहीं होती। इस तकनीक को आसानी से एक कमरे में किया जा सकता है। इसमें 25 इंच लंबाई, 23 इंच चौड़ाई और 200 गेज मोटाई के पॉलीथीन बैग का उपयोग होता है, जिनकी ऊंचाई 14-15 इंच होती है और मशरूम उत्पादन के लिए 15-16 इंच का व्यास निर्धारित किया जाता है। इस आकार और तकनीक से मशरूम का विकास बेहतर तरीके से होता है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता भी बढ़ती है।
मशरूम उगाने की ट्रे तकनीक
मशरूम उगाने की यह तकनीक बेहद सरल और प्रभावी है। इस तकनीक के जरिए किसान मशरूम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जा सकते हैं, क्योंकि मशरूम की पैदावार ट्रे में की जाती है। ट्रे का आकार 1/2 वर्ग मीटर और गहराई 6 इंच होती है, ताकि इसमें 28 से 32 किलोग्राम तक खाद आसानी से समा सके, जिससे मशरूम का उत्पादन बेहतर तरीके से हो सके।
निष्कर्ष
मशरूम उत्पादन के लिए तीन बेहतरीन तकनीकों के बारे में जानने के बाद, यह स्पष्ट है कि सही तकनीक और विधियों का उपयोग करके किसान आसानी से अपने उत्पादन को बढ़ा सकते हैं और अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। शेल्फ तकनीक, पॉलीथीन बैग तकनीक, और ट्रे तकनीक मशरूम की खेती के लिए अत्यंत प्रभावी साबित हुई हैं, जिनकी सहायता से न केवल पैदावार बढ़ती है, बल्कि कम लागत में अधिक मुनाफा भी मिलता है। बढ़ती मांग और पोषण से भरपूर मशरूम को उगाकर किसान अपने कृषि व्यवसाय में एक नई ऊंचाई प्राप्त कर सकते हैं।
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लगातार पूछे जानें वाले प्रश्न
मशरूम की खेती कौन से महीने में की जाती है?
मशरूम की खेती के लिए सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च के बीच का होता है. इस दौरान खेती से करने से किसान लागत का कई गुना मुनाफा कमा सकता है.