पेड़ों की खेती
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इन 3 पेड़ों की खेती करके आप भी कमा सकते है लाखों का मुनाफा

इन 3 पेड़ों की खेती करके आप भी कमा सकते है लाखों का मुनाफा: पेड़ों की खेती (एग्रोफॉरेस्ट्री) किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प है, जो कम लागत में अधिक मुनाफा प्रदान करती है। इसमें सफेदा, महोगनी, सागवान और चंदन जैसे पेड़ों की खेती से लंबे समय में अच्छा आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

कृषि वानिकी (एग्रोफॉरेस्ट्री) आज के समय में किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। पारंपरिक खेती के बजाय कई किसान पेड़ों की खेती में निवेश कर रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर मुनाफा हो रहा है।

देशभर में कई ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं, जहां किसान पेड़ लगाकर लाखों से करोड़ों तक की कमाई कर रहे हैं। खासकर सफेदा, महोगनी, सागवान, गम्हार और चंदन जैसे पेड़ों की खेती कम लागत और कम देखभाल में की जा सकती है, और इससे काफी अच्छा मुनाफा होता है।

पेड़ों की खेती (Tree Farming) के लाभ

पारंपरिक खेती से जहां अनाज और अन्य उत्पाद प्राप्त होते हैं, वहीं कृषि वानिकी से मूल्यवान लकड़ी मिलती है, जिसका उपयोग फर्नीचर और अन्य उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

भारत में उच्च गुणवत्ता वाली लकड़ी की बड़ी मांग है, इसलिए अक्सर विदेशों से लकड़ी का आयात किया जाता है। इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देशों में लकड़ी की खेती आम है, जिससे वहाँ से लकड़ी भारत में आयात की जाती है।

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महोगनी पेड़ की खेती

महोगनी मूल रूप से अमेरिका और मैक्सिको में उगने वाला पेड़ है। इसकी लकड़ी मोटी और मजबूत होने के कारण इसका उपयोग और खेती देश-विदेश में तेजी से बढ़ी, क्योंकि यह किसानों को अच्छा मुनाफा देने वाला पेड़ है। अमेरिका के बाद यह अफ्रीका पहुंचा, जहां इसकी बड़े पैमाने पर खेती शुरू हुई और धीरे-धीरे अफ्रीकी महोगनी ने वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना ली।

19वीं शताब्दी में महोगनी पेड़ की खेती भारत में शुरू हुई, और अब भारत में भी इसका व्यवसायिक स्तर पर उत्पादन होता है। महोगनी पेड़ की खेती किसानों के लिए अत्यधिक लाभकारी है, क्योंकि इसकी लकड़ी फर्नीचर और सजावटी वस्तुएं बनाने के लिए बेहतरीन मानी जाती है। इसके बीज और पत्तियों से तेल और मच्छर भगाने वाली दवाएं भी बनाई जाती हैं।

महोगनी के बीज का मूल्य प्रति किलो 1000 रुपये तक होता है। एक हेक्टेयर भूमि में लगभग 1100 महोगनी पेड़ लगाए जा सकते हैं, जो 12 साल में पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। प्रत्येक पेड़ से 20,000 से 25,000 रुपये तक की कमाई की जा सकती है, जिससे किसान 12 से 15 साल में करोड़पति बन सकते हैं।

महोगनी पेड़ की खेती न केवल भारत में कृषि उद्यमियों के लिए एक लाभकारी विकल्प साबित हो रही है, बल्कि यह पर्यावरणीय स्थिरता और दीर्घकालिक लाभ का भी साधन बनती जा रही है।

2. सागवान की खेती

सागवान के पेड़ 15 से 20 साल में पूरी तरह से विकसित हो जाते हैं, और इनका व्यापक उपयोग फर्नीचर, नाव, जहाज, खिड़कियां, और रेल डिब्बों के निर्माण में होता है। इसके अलावा, इसके पत्ते औषधीय गुणों के कारण भी उपयोगी होते हैं। एक एकड़ भूमि में लगभग 500 सागवान के पेड़ लगाए जा सकते हैं। 15-20 साल बाद एक सागवान का पेड़ 25,000 से 30,000 रुपये तक बेचा जा सकता है, जिससे किसान अच्छा लाभ कमा सकते हैं और लंबी अवधि में करोड़पति बनने की संभावना बढ़ जाती है।

3. सफेदा की खेती

सफेदा, जिसे यूकेलिप्टस के नाम से भी जाना जाता है, अपनी तेजी से बढ़ने वाली प्रजाति के कारण कृषि और वाणिज्यिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इसका उपयोग फर्नीचर, ईंधन, और कागज की लुगदी बनाने में बड़े पैमाने पर होता है। इसके अलावा, यूकेलिप्टस की लकड़ी की अच्छी मांग होने से किसान इससे अच्छी कमाई कर सकते हैं।

एक हेक्टेयर में लगभग 300 सफेदा के पौधे लगाए जा सकते हैं, जो 5 साल में पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। अगर सही तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए और उपयुक्त देखभाल की जाए, तो किसान 5 साल में एक हेक्टेयर से 70 से 80 लाख रुपए तक कमा सकते हैं। सफेदा की खेती में न केवल कम लागत आती है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है, क्योंकि यह जल संरक्षण में सहायक होता है और मिट्टी के क्षरण को रोकता है।

इसलिए, सफेदा की खेती किसानों के लिए एक लाभदायक और टिकाऊ विकल्प बन सकती है।

निष्कर्ष | Conclusion

इन पेड़ों की खेती से किसानों को लंबे समय में अच्छा आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है। सफेदा, महोगनी, और सागवान जैसे पेड़ न केवल उच्च मूल्य की लकड़ी प्रदान करते हैं, बल्कि इनकी खेती के साथ पर्यावरण का भी संरक्षण होता है। महोगनी और सागवान जैसे पेड़ों से मजबूत और टिकाऊ लकड़ी प्राप्त होती है, जिसका उपयोग फर्नीचर और निर्माण में किया जाता है, जबकि सफेदा तेजी से बढ़ने वाली प्रजाति होने के कारण किसानों को तेजी से मुनाफा देने का अवसर प्रदान करता है।

इन पेड़ों की खेती पारंपरिक कृषि की तुलना में अधिक लाभकारी हो सकती है, क्योंकि कम देखभाल और निवेश के साथ यह किसानों को लाखों से करोड़ों तक की कमाई करने में मदद करती है। इसलिए, जो किसान दीर्घकालिक निवेश और लाभ की योजना बना रहे हैं, उनके लिए पेड़ों की खेती (एग्रोफॉरेस्ट्री) एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है।

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लगातार पूछे जाने वाले प्रश्न

1.कौन सा पेड़ ज्यादा पैसा देता है?

महोगनी का पौधा 12 साल में 60 से 80 फुट ऊंचाई तक का घना पड़े हो जाता है. विशेषज्ञ कहते हैं कि एक पेड़ से लगभग 40 घन फुट लकड़ी मिल जाती है. अगर औसतन 1500 रुपये प्रति घन फुट के हिसाब से भी लकड़ी की बिक्री की जाती है तो एक पेड़ लगभग 60,000 रुपये में बिकता है. महोगनी का पौधा पांच वर्ष में एक बार बीज देता है.

2. एक सागवान का पेड़ कितने में बिकता है?

इसकी खेती में तकरीबन 45 से 50 हजार रुपये तक की लागत आती है. वहीं, 12 साल के बाद इसकी एक पेड़ की कीमत 40 हजार रुपये तक पहंच जाती है. ऐसे में यदि आप 12 साल के बाद 400 पेड़ बेचेंगे तो आपकी कुल कमाई एक करोड़ 60 लाख रुपये होगी.

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